काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा पर लांगटांग नेशनल पार्क के पास एक विशाल ग्लेशियर टूटने से विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन आया है [लांगटांग नेशनल पार्क]. इस ऐतिहासिक प्राकृतिक आपदा में अब तक 675 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है [लांगटांग नेशनल पार्क]. वहीं, करीब 3,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें जुटी हुई हैं.
मृतकों की संख्या: 675 से अधिक शव बरामद हो चुके हैं [लांगटांग नेशनल पार्क].
लापता नागरिक: दोनों देशों की सीमाओं को मिलाकर लगभग 3,000 लोग लापता हैं.
विदेशी पर्यटक: लापता लोगों में 320 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं.
बुनियादी ढांचा: अरबों डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह नष्ट हो चुका है.
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र तल से 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर का एक बहुत बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया. इसके मलबे ने त्रिशूली और ल्हेंदे खोला नदी घाटियों में अचानक भीषण बाढ़ (Flash Floods) ला दी [त्रिशूली नदी]. पानी का स्तर मात्र कुछ ही मिनटों में 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया, जिससे निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका भी नहीं मिला.
बाढ़ के तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले कई गांवों का नामोनिशान मिटा दिया है:
हाइड्रो प्रोजेक्ट्स: अपर त्रिशूली पनबिजली परियोजना (Upper Trishuli Hydropower Project) को भारी नुकसान पहुंचा है, जहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी लापता हैं.
संपर्क टूटा: चीन और नेपाल को जोड़ने वाला रसुवागढ़ी सीमा चेकपोस्ट पूरी तरह पानी में बह गया है.
पुल और सड़कें: क्षेत्र के 19 से अधिक प्रमुख पुल और संपर्क मार्ग पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं.
मलबे से मिल रहे सैकड़ों शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. नुवाकोट और धाडिंग जिलों में स्थानीय अधिकारियों ने अज्ञात शवों का डीएनए (DNA) सैंपल लेना शुरू कर दिया है. इन शवों को एक विशिष्ट कोड (यूनिक नंबर) देकर सामूहिक रूप से दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में उनके परिजनों की पहचान की जा सके.
संकट के इस समय में भारत ने तत्काल मदद का हाथ बढ़ाया है:
राहत सामग्री: भारत सरकार ने मानवीय सहायता और जरूरी दवाओं की चौथी खेप काठमांडू भेजी है.
भारतीयों का रेस्क्यू: भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है.
लापता भारतीय: विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं.
अंतरराष्ट्रीय सहायता: नेपाल सरकार ने अब संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य देशों से मिल रही आपातकालीन मानवीय मदद को स्वीकार करना शुरू कर दिया है.
सवाल 1: नेपाल में इस अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) का मुख्य कारण क्या था?
जवाब: इसका मुख्य कारण नेपाल-तिब्बत सीमा पर लांगटांग नेशनल पार्क के पास करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक विशाल ग्लेशियर का टूटना और उसके बाद हुआ भीषण भूस्खलन था [लांगटांग नेशनल पार्क].
सवाल 2: इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कितने लोगों की जान जा चुकी है?
जवाब: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 675 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 3,000 लोग लापता हैं [लांगटांग नेशनल पार्क].
सवाल 3: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कैसे किया जा रहा है?
जवाब: शवों की स्थिति खराब होने और पहचान न हो पाने के कारण प्रशासन उनका डीएनए (DNA) सैंपल ले रहा है और उन्हें एक यूनीक नंबर कोड देकर सामूहिक रूप से दफना रहा है.
सवाल 4: भारत सरकार नेपाल की मदद के लिए क्या कदम उठा रही है?
जवाब: भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी है. इसके अलावा भारतीय रेस्क्यू टीमें वहां फंसे भारतीय और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं.
सवाल 5: क्या प्रभावित इलाकों में अभी भी कोई खतरा बना हुआ है?
जवाब: हां, मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने फिर से भारी बारिश की चेतावनी दी है. नदियों में मलबे के कारण बनी कृत्रिम झीलों के फटने का खतरा अभी भी बना हुआ है.
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